
दोस्तों, जब Artemis 2 मिशन की खबर आई तो बहुत से फोटोग्राफी प्रेमी हैरान रह गए। NASA ने चंद्रमा के चारों ओर घूमने वाले मानव मिशन के लिए सबसे नई मिररलेस कैमरा जैसे Nikon Z9 या Sony/Canon के लेटेस्ट मॉडल नहीं चुने। बल्कि उन्होंने 2016 में लॉन्च हुए 10 साल पुराने Nikon D5 DSLR को मुख्य कैमरा के रूप में चुना।
लोग सोच रहे थे – अरे भाई, अरबों डॉलर का मिशन है, फिर पुराना DSLR क्यों? लेकिन जब आप पूरी कहानी सुनोगे तो समझ आएगा कि NASA ने बिल्कुल सही फैसला लिया। आज मैं आपको इसी बात पर विस्तार से बताता हूँ – जैसे दोस्त से बात कर रहा हूँ, बिना किसी जटिल टेक्निकल भाषा के।
Artemis 2 मिशन क्या है?
Artemis 2 NASA का वो महत्वपूर्ण मिशन है जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर चंद्रमा के चारों ओर घूमने वाले हैं। यह Apollo 17 के बाद पहला क्रूड मिशन है जो low Earth orbit से बाहर जा रहा है। मिशन का मकसद सिर्फ पहुंचना नहीं, बल्कि चंद्रमा की सतह, Earth का नजारा और स्पेस के अंधेरे में क्या-क्या होता है, उसे अच्छे से डॉक्यूमेंट करना भी है।
इसी डॉक्यूमेंटेशन के लिए कैमरा बहुत जरूरी है। अंतरिक्ष यात्री हाथ में कैमरा लेकर खिड़की से शॉट्स लेंगे, Earth की तस्वीरें खींचेंगे और चंद्रमा के dark side पर भी फोटो लेंगे। अब ऐसे माहौल में कैमरा कैसा होना चाहिए?
Nikon D5 को चुनने की मुख्य वजहें
NASA ने D5 को बिना सोचे-समझे नहीं चुना। इसके पीछे कई प्रैक्टिकल और टेक्निकल कारण हैं:
1. कम रोशनी में कमाल का परफॉर्मेंस (Low Light Beast)
स्पेस में, खासकर चंद्रमा के dark side पर सूरज की रोशनी बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती। वहाँ की स्थिति near darkness जैसी है। Nikon D5 का फुल-फ्रेम सेंसर हाई ISO पर शानदार काम करता है। इसका expanded ISO 3,280,000 तक जाता है (हालांकि इतना हाई ISO रोजमर्रा में useless होता है, लेकिन base high ISO performance बहुत मजबूत है)।
D5 कम रोशनी में कम noise के साथ क्लियर इमेज देता है। Artemis 2 के दौरान कमांडर Reid Wiseman ने Earth की जो तस्वीर ली (ISO 51,200 पर), वो इसी कैमरे से थी और बहुत सुंदर आई। नए मिररलेस कैमरे जैसे Z9 का max ISO 102,400 तक ही है – यानी D5 लगभग 30 गुना ज्यादा sensitive है dark conditions में।
2. रेडिएशन और स्पेस के कठिन माहौल में साबित विश्वसनीयता
स्पेस में radiation बहुत ज्यादा होती है, खासकर Van Allen belt के बाहर। D5 को NASA ने पहले ही ISS (International Space Station) पर इस्तेमाल किया था। 2017 से NASA ने D5 के कई यूनिट्स खरीदे और उन्हें radiation-hardened बना लिया – मतलब custom firmware और modifications के साथ।
यह कैमरा radiation effects को अच्छे से हैंडल करता है। नया कैमरा लाना जोखिम भरा होता क्योंकि उसकी टेस्टिंग में सालों लग सकते हैं। D5 पहले से “flight-qualified” था – यानी NASA जानता था कि यह लॉन्च के vibration, extreme temperature swings (-100°C से +100°C तक) और vacuum में भी काम करेगा।
3. Optical Viewfinder का फायदा
D5 DSLR होने की वजह से इसमें optical viewfinder है। स्पेस में high contrast situations (चमकदार सूरज वाली सतह और गहरे shadows) में electronic viewfinder (EVF) कभी-कभी overwhelm हो सकता है या contrast ज्यादा दिखा सकता है। Astronauts ने खुद कहा कि D5 का mirrored viewfinder lunar surface को देखने में ज्यादा natural और helpful लगता है। कुछ मामलों में वे D5 को “telescope” की तरह भी इस्तेमाल करते हैं।
4. टैंक जैसी मजबूती और ergonomics
D5 को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स और प्रेस फोटोग्राफर्स के लिए बनाया गया था – मतलब यह बहुत rugged है। बड़े बटन, मजबूत डायल्स और grip स्पेस सूट पहने astronauts के लिए आसान हैं। Zero gravity में भी कैमरा अच्छे से हैंडल होता है।
नए mirrorless कैमरे में छोटे बटन और touchscreen ज्यादा होते हैं, जो gloves या सूट के साथ मुश्किल हो सकते हैं।
5. पहले से ट्रेंड और टेस्टेड प्लेटफॉर्म
NASA D5 को ISS पर सालों से यूज कर रहा था। Astronauts को इस कैमरे की आदत थी। Training के दौरान भी यही कैमरा यूज होता था। नया कैमरा लाने का मतलब नई training, नई लेंस कंपैटिबिलिटी और नई रिस्क।
D5 के साथ wide-angle और telephoto lenses पहले से certified थे। Nikon ने NASA के लिए special modified versions बनाए।
Z9 भी गया, लेकिन D5 मुख्य रहा
Artemis 2 पर Nikon Z9 भी था – astronauts ने आखिरी समय में उसे शामिल करने की कोशिश की क्योंकि future missions (Artemis 3) के लिए Z9-based Handheld Universal Lunar Camera (HULC) तैयार हो रही है। Z9 को radiation testing के लिए ले जाया गया, लेकिन मुख्य काम D5 का ही था।
D5 की reliability और low-light performance ने इसे unbeatable बना दिया।
क्या यह पुराने कैमरे को नया जीवन देता है?
हाँ! यह दिखाता है कि “अगर टूटा नहीं तो ठीक करो” वाली कहावत स्पेस में भी लागू होती है। D5 ने साबित किया कि DSLR अभी मर नहीं गए। Low light, dynamic range और proven track record अभी भी मायने रखते हैं।
Artemis 2 की कई सुंदर तस्वीरें (Earth from space, Moon flyby) इसी D5 से ली गईं। ये तस्वीरें हमें याद दिलाती हैं कि टेक्नोलॉजी नई हो या पुरानी, असली मायने परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता के हैं।
आखिर में…
NASA ने Nikon D5 इसलिए चुना क्योंकि स्पेस कोई फोटोग्राफी कॉम्पिटिशन नहीं है। वहाँ glamour नहीं, survival और reliable results मायने रखते हैं। D5 का low-light capability, radiation resistance, optical viewfinder, rugged build और NASA के साथ लंबा इतिहास – ये सब मिलकर इसे perfect tool बना देते हैं।
अगले मिशन्स में शायद Z9 या नई HULC मुख्य भूमिका निभाए, लेकिन Artemis 2 में D5 ने अपना कमाल दिखाया। यह कहानी हमें सिखाती है – कभी-कभी पुराना टूल भी नई चुनौतियों के लिए सबसे सही होता है।
आप क्या सोचते हो? क्या Nikon D5 की ये कहानी आपको हैरान करती है? या आपको लगता है कि नया mirrorless बेहतर होता? कमेंट में जरूर बताओ।
FAQ: NASA और Nikon D5 के बारे में आपके सवाल
Q1. NASA ने Artemis 2 मिशन के लिए Nikon D5 क्यों चुना, जबकि ये 10 साल पुराना कैमरा है?
Answer: मुख्य वजह reliability और proven track record है। D5 को NASA ने ISS पर सालों से टेस्ट किया था। यह radiation, extreme temperature और vibration को अच्छे से हैंडल करता है। नया कैमरा लाना जोखिम भरा होता क्योंकि उसकी पूरी testing में साल लग जाते। Low light में भी D5 का performance अभी भी बेहतरीन है।
Q2. Nikon D5 का low light performance इतना खास क्यों है?
Answer: D5 का expanded ISO 3,280,000 तक जाता है, जबकि नया Z9 सिर्फ 102,400 तक। मतलब D5 अंधेरे में लगभग 30 गुना ज्यादा sensitive है। चंद्रमा के dark side पर जहाँ रोशनी बहुत कम होती है, वहाँ ये फर्क जान बचा सकता है। Commander Reid Wiseman ने Earth की जो खूबसूरत तस्वीर ली, वो इसी D5 से ISO 51,200 पर थी।
Q3. क्या Nikon Z9 भी Artemis 2 पर गया था?
Answer: हाँ, astronauts ने आखिरी समय में Z9 को शामिल करवाया। लेकिन मुख्य कैमरा D5 ही रहा। Z9 को future missions (जैसे Artemis 3) के लिए testing के तौर पर ले जाया गया। D5 को “primary” कैमरा माना गया क्योंकि वो पहले से flight-qualified था।
Q4. Optical viewfinder का फायदा क्या था?
Answer: स्पेस में extreme contrast (चमकदार रोशनी और गहरे shadows) में optical viewfinder EVF से ज्यादा natural लगता है। Astronauts ने D5 को “telescope” की तरह भी इस्तेमाल किया lunar surface को detail में देखने के लिए। Gloves और space suit में भी बड़े बटन और grip आसानी से काम करते हैं।
Q5. Radiation से कैमरा कैसे बचता है?
Answer: NASA ने D5 के कैमरों को specially modified (radiation-hardened) बनाया। Custom firmware और shielding के साथ ये Van Allen belt और deep space की radiation को बेहतर हैंडल करता है। नया कैमरा इतनी जल्दी certify नहीं हो पाता।
Q6. क्या Nikon D5 अभी भी 2026 में बेस्ट कैमरा है?
Answer: नहीं, रोजमर्रा की फोटोग्राफी में Z9 या नई mirrorless बेहतर हैं। लेकिन Artemis 2 जैसे स्पेस मिशन के लिए D5 “perfect tool” था – proven, reliable और low light में मजबूत। यह दिखाता है कि नई टेक्नोलॉजी हमेशा हर काम के लिए बेस्ट नहीं होती।
Q7. Artemis 2 में और कौन से कैमरे थे?
Answer: मुख्य रूप से दो Nikon D5 DSLR, एक Nikon Z9, modified GoPro cameras और iPhone 17 Pro Max भी शामिल थे। लेकिन Earth और Moon की मुख्य high-quality तस्वीरें D5 से ही ली गईं।
Q8. भविष्य के मिशनों में क्या Nikon Z9 या नया कैमरा मुख्य होगा?
Answer: हाँ, Handheld Universal Lunar Camera (HULC) Z9 बेस्ड है, जो Artemis 3 और आगे के मिशनों के लिए तैयार हो रही है। D5 ने Artemis 2 में अपना कमाल दिखाया, लेकिन future में mirrorless ज्यादा इस्तेमाल होंगे।

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